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लिंग: UPSSSC PET के लिए संपूर्ण हिंदी व्याकरण नोट्स

    

लिंग: UPSSSC PET के लिए संपूर्ण हिंदी व्याकरण नोट्स


UPSSSC PET 2026 की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए सामान्य हिंदी एक महत्वपूर्ण विषय है। आयोग द्वारा दिए गए UPSSSC PET 2026 के सिलेबस में सामान्य हिंदी के अंतर्गत लिंग को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। सामान्य हिंदी के लिए परीक्षा में 5 अंक निर्धारित हैं।


हिंदी व्याकरण में लिंग से संबंधित प्रश्न सामान्यतः शब्दों के स्त्रीलिंग-पुल्लिंग रूप, लिंग पहचानने और वाक्य में सही प्रयोग पर आधारित होते हैं। इसलिए PET अभ्यर्थियों के लिए लिंग की परिभाषा, प्रकार, पहचानने के नियम और महत्वपूर्ण उदाहरणों को अच्छी तरह समझना जरूरी है।


लिंग किसे कहते हैं?

लिंग संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'चिह्न' या 'निशान'। हिन्दी के शब्दों का लिंग निर्धारण संज्ञा के आधार पर होता है।


संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी या भाव के पुरुष जाति या स्त्री जाति होने का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो किसी शब्द से यह पता चले कि वह पुरुष जाति से संबंधित है या स्त्री जाति से, तो उसी आधार पर उस शब्द का लिंग निर्धारित किया जाता है।


उदाहरण:

लड़का — पुल्लिंग

लड़की — स्त्रीलिंग

घोड़ा — पुल्लिंग

घोड़ी — स्त्रीलिंग

राजा — पुल्लिंग

रानी — स्त्रीलिंग


लिंग: UPSSSC PET के लिए संपूर्ण हिंदी व्याकरण नोट्स



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हिंदी में लिंग के कितने प्रकार हैं?

हिंदी भाषा में मुख्य रूप से दो प्रकार के लिंग माने जाते हैं:

  • पुल्लिंग

  • स्त्रीलिंग


संस्कृत में लिंग के तीन प्रकार माने जाते हैं—पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग। लेकिन हिंदी में मुख्यतः दो ही लिंग होते हैं।


1. पुल्लिंग

जिन संज्ञा शब्दों से पुरुष जाति का बोध होता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं। जैसे- आचार्य, लड़का, कुम्हार, संसार, समुदाय, लाला, ठठेरा, किन्नर, हिजड़ा, अपरिग्रह, भव, भगवान, तपस्वी, गायक आदि।


पुल्लिंग शब्दों की पहचान पं कामता प्रसाद गुरु के अनुसार-


नियम 1- जिन भाववाचक संज्ञा शब्दों के अन्त में आ, आव, पा, पन, ना प्रत्यय लगा हो वे प्रायः पुल्लिंग होते हैं।


जैसे- काला (आ), चढ़ाव (आव), बुढ़ापा (पा), लड़कपन (पन), खाना (ना) आदि। पुल्लिंग होते हैं।


नियम 2- पर्वत, दिनों के नाम और कुछ ग्रहों के नाम प्रायः


जैसे- विंध्याचल (पर्वत), हिमालय (पर्वत), चैत्र (मास), सोमवार


(दिन), सूर्य, चन्द्र (ग्रह) आदि।


अपवाद- पृथ्वी स्त्रीलिंग है।


नियम 3- पेड़ों के नाम प्रायः पुल्लिंग होते हैं।


जैसे- शीशम, सागौन, कटहल, पीपल, महुआ, आम, बरगद, नीम, जामुन, कचनार आदि।


अपवाद- इमली, लीची, नाशपाती, खिरनी, नारंगी आदि स्त्रीलिंग हैं।


नियम 4- अनाजों के नाम प्रायः पुल्लिंग होते हैं।


जैसे- गेहूं, चावल, बाजरा, चना, मटर, जौ, उड़द, तिल, मक्का आदि।


अपवाद- अरहर, जुआर, मकई, मूँग, सरसों आदि स्त्रीलिंग हैं।


नियम 5- धातुओं एवं द्रव पदार्थों के नाम प्रायः पुल्लिंग होते हैं।

जैसे- सोना, ताँबा, घी, पानी, लोहा, पीतल, तेल, दूध, दही, कोयला, तेज़ाब, इत्र, सिरका आदि।


अपवाद- चाँदी, चाय, स्याही, शराब, छाछ (किन्तु दही पुल्लिंग होता है), मिट्टी आदि स्त्रीलिंग हैं।


नियम 6- रत्नों के नाम प्रायः पुल्लिंग होते हैं।


जैसे- हीरा, पन्ना, मूँगा, माणिक, मोती, पुखराज आदि।


अपवाद- मणि स्त्रीलिंग है।


नियम 7- शरीर के अवयवों (अंगों) के नाम पुल्लिंग होते हैं।


जैसे- हाथ, पैर, दाँत, मुँह, मस्तक, गला, रोम, नाखून (नख), नेत्र, तन आदि।


अपवाद- आँख, नाक, जीभ, खाल, जाँघ, नस, इंद्रिय, हड्डी, काँख, कलाई आदि स्त्रीलिंग हैं। फिर


नियम 8- जल, स्थल और भूमण्डलों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे- समुद्र, देश, नगर, द्वीप, आकाश, पाताल, सरोवर आदि।


अपवाद- पृथ्वी, नदी, झील, घाटी


नियम 9- वर्णमाला के सभी वर्ण (अक्षर) पुल्लिंग होते हैं।

जैसे- अ, उ, ए, ओ, क, ख, य, र, ल, व, श आदि।


अपवाद- इ, ई और ऋ स्त्रीलिंग वर्ण हैं।


पुल्लिंग की पहचान से सम्बन्धित अन्य महत्त्वपूर्ण नियम


जिन शब्दों के सार्थक जोड़े संभव होते हैं उनमें पुरुषबोधक संज्ञाएँ पुल्लिंग एवं स्त्रीबोधक संज्ञाएँ स्त्रीलिंग होती हैं।


जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

पिता


भाई


मोर


घोड़ा


गूँगा


लुहार


साधु


तपस्वी


धाता


भव


विद्वान


देव


गोप


साँप


मेहतर


हंस


कुम्हार


नेता


धावक


लाला


बड़ा


देवर


प्रिय


गुरु


विधाता


पड़ोसी


बलवान


कबूतर


तरुण


राजा


एकाकी


अध्यक्ष


भर्ता


वर


जुलाहा


परोपकारी


सेठ


दास


ज्ञानवान्


अध्यापक


साहब

माता


बहन


मोरनी


घोड़ी


गूँगी


लुहारिन


साध्वी


तपस्विनी


धात्री


भवानी


विदुषी


देवी


गोपी


साँपिन


मेहतरानी


हंसिनी


कुम्हारिन


नेत्री


धाविका


ललाइन


बड़ी


देवरानी


प्रिया


गुरुआइन


विधात्री


पड़ोसन


बलवती


कबूतरी


तरुणी


रानी


एकाकिनी


अध्यक्षा


भर्ती


वधू


जुलाहिन


परोपकारिणी


सेठानी


दासी


ज्ञानवाती


अध्यापिका


मेम

कवि


रचयिता


कर्ता


अभिनेता


पूज्य


आचार्य


शिक्षक


भाग्यवान


ठठेरा


गायक


ठाकुर


पंडित


जेठ


योगी


कृष्ण


पुजारी


बिलाव


प्रबंधकर्ता


नायक


कमल


जेठ


तेली


सुनार


दाता


भगवान


वीर


सम्राट


ऋषि


नर्तक


मूर्ख


महोदय


यशस्वी


बिलाव


चमार


ब्राह्मण


विधुर


इन्द्र


नौकर


हरिणा


युवा


भवदीय

कवयित्री


रचयित्री


कर्त्री


अभिनेत्री


पूज्या


आचार्या


शिक्षिका


भाग्यवती


ठठेरिन


गायिका


ठकुराइन


पंडिताइन


जेठानी


योगिनी


कृष्णा


पुजारिन


बिल्ली


प्रबंधकर्ती


नायिका


कमलिनी


जेठानी


तेलिन


सुनारिन


दात्री


भगवती


वीरांगना


सम्राज्ञी


ऋषिका


नर्तकी


मूर्खा


महोदया


यशस्विनी


बिल्ली


चमारिन


ब्राह्मणी


विधवा


इन्द्राणी


नौकरानी


हरिणी


युवती


भवदीया


पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार-


1.जिन संज्ञा शब्दों के अंत में त्र लगा होता है वे पुल्लिंग शब्द होते हैं।

जैसे- पत्र, नेत्र, चित्र, क्षेत्र, चरित्र, पात्र, नक्षत्र, शस्त्र, मित्र, गोत्र आदि।


2.समुदाय वाचक संज्ञा शब्द भी पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग का बोध कराते हैं। इन समुदाय वाचक (समूह वाचक) शब्दों के व्यवहार से पता चलता है कि उक्त शब्द स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग।

जैसे- पुल्लिंग-समूह, झुंड, कुटुम्ब, संघ, दल, मंडल आदि।

स्त्रीलिंग- भीड़, फ़ौज, सभा, प्रजा, टोली आदि।


3.कुछ पशु-पक्षी जो कि अपनी सम्पूर्ण जाति (पुल्लिंग या स्त्रीलिंग) का बोध कराते हैं, किन्तु इनमें से कुछ व्यवहारिक रूप से पुल्लिंग होते हैं तो कुछ स्त्रीलिंग-


पुल्लिंग - चीता, पक्षी, कौआ, उल्लू, खटमल, केंचुआ, भेड़िया आदि।


स्त्रीलिंग - कोयल, मक्खी, तितली, जोंक, मैना, गिलहरी, चील, मछली, बटेर आदि।


4.'ज' प्रत्ययांत (जिनके अंत में ज लगा हो) संज्ञाएँ सामान्यतः पुल्लिंग होते हैं।


जैसे- जलज, सरोज, पिडंज, स्वेदज, पंकज, उरोज आदि।


5. जिन भाववाचक संज्ञाओं के अंत में त्व, त्य, व, र्य, आदि शब्द लगे होते है वे पुल्लिंग होते हैं।


जैसे- सतीत्व, गुरुत्व, लघुत्व, महत्त्व, नृत्य, कृत्य, लाघव, गौरव, वैभव, माधुर्य, धैर्य, शौर्य आदि।


6.जिन शब्दों के अन्त में आर, आय व आस शब्द लगा हो वे प्रायः पुल्लिंग होते हैं।


जैसे- विकार, विस्तार, संसार, समुदाय, अध्याय, विकास, ह्रास आदि।


अपवाद- आय स्त्रीलिंग शब्द है।


7. त प्रत्ययांत संज्ञाएँ पुल्लिंग होते हैं।


जैसे- चरित, गणित, फलित, गीत, स्वागत ।


8. संज्ञा शब्दों को छोड़कर जिन शब्दों के अंत में ख लगा हो वे प्रायः पुल्लिंग होते हैं-


जैसे- रुख, नख, मख, लेख, मुख, दुःख, सुख, शंख, पाख।


9. जिन शब्दों के अंत में आब शब्द लगा होता है वे प्रायः पुल्लिंग होते हैं।

जैसे- गुलाब, हिसाब, जवाब, कबाब, जुलाब ।


अपवाद- शराब, किताब, मिहराब (मेहराब), आदि स्त्रीलिंग हैं।



कुछ महत्त्वपूर्ण पुल्लिंग शब्द

अनुभव, अंतरिक्ष, अन्तर्धान, अनार, अनाज, अनुसंधान, अक्षर, अदरक, अनुच्छेद, अपराध, अनुदान, अकाल, अक्षत, अनन्नास, अश्रु, अंश, अस्त्र, अंधेर, आदेश, आच्छादन, आलू, आटा, आँसू, आयोग, आभार, आहार, आयोजन, आचरण, आखेट, आलोक, आयात, अमरूद, आविष्कार, आईना, आषाढ़, आविर्भाव, आमंत्रण, आक्रमण, अध्यक्ष, अपरिग्रह, आरोप, आशीर्वाद, आलस्य, इलाका, इस्तीफा, ईंधन, इलाज, इंसाफ, इत्र, इनाम, इस्पात, इंतजार, उद्भव, उपहार, उत्साह, उत्तर, उद्धार, उपवास, उल्लेख, उद्‌गार, उन्मूलन, उपसर्ग, उबटन, उपकरण, उपचार, उत्पादन, उत्कर्ष, उत्पीड़न, उल्लास, उपहास, ऊन, उद्यम, ओठ, औजार, ओला, औसत, कहार (कुम्हार), कर्ता, कुटुम्ब, कशीदादार, कपड़ा, काव्य, कपूर, कैमरा, क्रोध, कोश, काष्ठ, कष्ट, कार्य, कथन, काढ़ा, कबाब, कवच, काजल, काठ, काँच (शीशा), कफन, किन्नर, कीर्तन, कीचड़, कुष्ठ, कुआँ, कुशल, कुहासा, केश, कोष, खरगोश, खेल, खेत, खत, खटमल, खजूर, खरबूजा, खीरा, खान-पान, गन्ना, ग्रंथ, गौरव, गेहूँ, गुनाह, गजट, गर्व, गिरगिट, गुलाब, गोदाम, गुलाम, गृह, गीत, गोत्र, ग्रह, ग्रहण, गौरव, गिद्ध, घाँघरा (लहँगा), घूँघट, घर, घोटाला, घड़ा, घी, चन्द्र, चर्चा, चमड़ा, चन्दन, चमत्कार, चन्द्रमा, चाँद, चीन, चाकू, चुनाव, चौपाल, चयन, चैन, चारागाह, चलचित्र, चमगादड़, चाक, चक्रव्यूह, चश्मा, चूल्हा, छाता, छात्र, छछँदर, छन्द, जीरा, जनपद, जिक्र, जुकाम, जिहाद, जोश, जैतून, जुलूस, जासूस, जिगर, जख्म, जुर्म, जवाब, झुरमुट, झुण्ड, झूमर, टेसू, टापू, टिकट, टैक्स, टिफिन, टोप, ठहराव, डण्डा, ढोल, ढेर, ढोंग, तारा, तालु, ताबीज, तम्बाकू, तिलक, तेजाब, तन, तीर्थ, तम्बूरा, तराजू, तेजस्वी, तबला, तिनका, तालाब, तत्त्व, तंत्र, तिल, ताप, तीतर, तरबूज, तरकश, त्योहार, थोक, देश, दुपट्टा, द्विज, दिन, दाँत, दही, दीपक, दुःख, द्वीप, द्वार, दण्ड, दंगा, दर्पण, दल, दहेज, दफ्तर, दरबार, दास, दूध, दूतावास, दारा, दाग, दानपत्र, दृश्य, द्वंद्व, दोष, देहात, द्वेष, दलाल, दुशाला, धागा, धावक, धैर्य, धन, धर्म, धंधा, धान, धनुष, धुआँ, धावा, नूपुर, नृप, नमक, नेत्र, निकास, नृत्य, न्याय, निबंध, निवास, नाटक, निगम, नगर, निर्माण, नसीब, नरक, निवेदन, नकद, निर्देश, निशान, नीड़, निर्वाण, निष्कर्ष, नैहर, नीलाम, नक्षत्र, निराशा, नियम, पाठक, पुदीना, पड़ोस, पक्षी, पजामा, पनीर, पेड़, पड़ोसी, पत्ता, पालन, पर्वत, पत्र, प्राणायाम, प्रयोग, पता, परिणाम, पैसा, पानी, प्रतिवेदन, पति, पंख, पहिया, पहाड़, पत्थर, पोषण, पराठा, पन्ना, प्रलय, प्रलाप, प्रहार, पुस्तकालय, पथ, प्रभाव, प्रकोप, प्रत्यय, प्रदेश, परिचय, प्रतिबंध, प्रश्न, प्रतिबिम्ब, फुल्का, फुटपाथ, फूल, बिलाव, बोल, ब्रह्मपुत्र, बन्दोबस्त, बोध, बुढ़ापा, बन्दरगाह, बबूल, बादाम, बचपन, बहिष्कार, बुखार, भत्ता, भ्रमर, भात, भाषण, भूकम्प, भजन, भ्रमण, भूषण, भाष्य, भेंडिया, महीना, मस्तक, मालिक, महोदय, मोहनभोग, मातृत्व, मार्ग, मिलान, माह, माधुर्य, मट्ठा, मुनि, मंत्रालय, मवेशी, मक्खन, मकबरा, मंच, मंतव्य, मुकदमा, मित्र, मजा, मठ, माघ, मेघ, युगावतार, योगदान, यातायात, यंत्र, यश, रसगुल्ला, राष्ट्र, रोष, राज, राजन, रायता, रुख, रूप, रत्न, रोमांच, रहस्य, राग, रक्त, रोग, रवि, रस्सा, लोहा, लगान, लेख, लोभ, लौंग, लालच, लक्ष्य, लश्कर, लड़कपन, वचन, विद्वान, विधुर, वक्त, व्याख्यान, विधेयक, विराम, विधान, व्यय, विकास, वाङ्मय, विवाह, विवाद, वित्त, वैभव, व्यंजन, विक्रय, वाष्प, वसन्त, वैराग्य, शिष्य, शिष्टाचार, शेर, शरबत, शशि, शंख, शीशम, शस्त्र, श्रम, शहद (मधु), शहतूत, शौर्य, शीर्ष, शैशव, शून्य, षड्यंत्र, षडानन, संसार, समुदाय, सागर, सौभाग्य, सोन, सिंधु, सूत, सेतु, सोड़ा, स्वर्ग, संघ, संकल्प, सर्प, सन्देश, सृजन, संस्कार, सम्पादन, समायोजन, स्थान, स्वर, सहयोग, सचिवालय, साहित्य, संस्मरण, स्पर्श, सार, सम्बल, सिंगार, स्वदेश, संकट, संविधान, संगठन, संयोग, सिरका, सौजन्य, संकलन, सलाम, स्मारक, संकेत, संकोच, सन्देह, सन्तुलन, संस्थान, सिंदूर, सूचीपत्र, हलुआ, हेतु, हुंकार, होश, होंठ, क्षण, ज्ञान, क्षेत्र, हिसाब, हुलास, हमला, हवाला



2. स्त्रीलिंग

जिन संज्ञा शब्दों से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं। जैसे- लड़की, घोड़ी, हथिनी, पंडिताइन, ठकुराइन आदि।


स्त्रीलिंग की पहचान से सम्बन्धित कुछ महत्त्वपूर्ण नियम- पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार-


1. आकारान्त, इकारान्त, ईकारान्त, नकारान्त, नाकारान्त, उकारांत, ऊकारांत शब्द स्त्रीलिंग होते हैं।


  • आकारान्त- खटिया, पुड़िया, दया, माया, क्षमा, कृपा, लज्जा आदि।
  • इकारान्त- निधि, प्रतिनिधि, रुचि, केलि, राशि, अग्नि, छवि आदि।
  • ईकारान्त- नदी, रोटी, टोपी, उदासी, चिट्ठी।

           अपवाद- पानी, घी, मोती, दहीं आदि सभी शब्द पुल्लिंग हैं।

  • नकारान्त- रहन-सहन, जलन, उलझन आदि।

         अपवाद- चलन पुल्लिंग शब्द है।

  • नाकारान्त- प्रार्थना, वेदना, प्रस्तावना, घटना, रचना आदि।
  • उकारांत- ऋतु, मृत्यु, धातु, आयु, वस्तु आदि।

         अपवाद- मधु (शहद), अश्रु, मेरु, तालु, सेतु, हेतु आदि शब्द पुल्लिंग शब्द हैं।

  • ऊकारांत- बालू, दारू, झाडू, लू आदि।

         अपवाद- आँसू, टेसू, आलू, रतालू आदि शब्द पुल्लिंग हैं।


जिन संज्ञा शब्दों के अंत में ख लगा होता है। वे प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे- ईख, भूख, राख, चीख, कोख, लाख, देख-रेख आदि।


अपवाद- रुख, पाख


ध्यान दें- यहाँ संज्ञा शब्दों के अन्त में ख लगे होने की बात हो रही है, जबकि पुल्लिंग में संज्ञा को छोड़कर अन्य शब्दों के अन्त में ख लगने की बात की गई थी।


2. जिन भाववाचक संज्ञाओं के अन्त में ट, वट, हट आदि शब्द लगे होते हैं, वे प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे झंझट, आहट, चिकनाहट, बनावट, सजावट, घबराहट आदि।


3. भाषा, बोली एवं लिपियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे- हिन्दी,संस्कृत, देवनागरी, गुरुमुखी, रोमन, पहाड़ी, पंजाबी, गुजराती, तेलगू, मलयालम आदि।


4. जिन शब्दों के अन्त में इया प्रत्यय आता है वे स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे- कुटिया, खटिया, चिड़िया आदि।


5. जिन शब्दों के अन्त में इमा प्रत्यय लगा होता है वे स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे- महिमा, गरिमा, लालिमा आदि।


6. नदियों के नाम प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी, गोदावरी, ताप्ती, कृष्णा।


अपवाद- सोन, सिंधु, ब्रह्मपुत्र आदि पुल्लिंग हैं।


7. तारीख एवं तिथियों के नाम प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे- पहली (तारीख), दूसरी (तारीख)।


तिथियाँ- प्रतिपदा, अमावस्या, पूर्णिमा, तीज, दूज आदि।


8. नक्षत्रों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे- अश्विनी, भरणी, रोहिणी, रेवती, मृगशिरा, चित्रा आदि।


9. समूहवाचक स्त्रीलिंग शब्द।

जैसे भीड़, कमेटी, फौज, सभा, सेना, कक्षा आदि।


10. प्राणिवाचक स्त्रीलिंग शब्द धाय, संतान, सवारी, सौत आदि।


11. खाद्य पदार्थों (भोजनों) के नाम स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे- पूरी, कचौरी, दाल, रोटी, खिचड़ी, कढ़ी आदि।


अपवाद- भात, रायता, हलुआ, मोहनभोग आदि पुल्लिंग शब्द हैं।


12. कुछ कपड़े भी स्त्रीलिंग की श्रेणी में आते हैं।

जैसे- साड़ी, पगड़ी, टोपी, पैंट, कमीज़ आदि।


13. कुछ मसालों के नाम भी स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे लौंग, इलायची, अजवायन, सुपारी, जावित्री, दालचीनी, सौंफ़, हल्दी, मिर्च, धनिया आदि।


अपवाद- तेजपात (तेजपत्ता), केसर, जीरा आदि पुल्लिंग शब्द हैं।


14. राशि के नाम प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे- सिंह, मेष, तुला, कुम्भ, मीन, कर्क आदि।


15. जिन शब्दों के अंत में ति और नि लगा हो वे स्त्रीलिंग होते हैं।

जैसे-जाति, गति, मति, हानि, रीति, योनि, ग्लानि।


हमेशा स्त्रीलिंग के रूप में प्रयुक्त होने वाले शब्द-

जैसे- मक्खी, कोयल, तितली, मैना, चील, मछली आदि।


पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के कुछ महत्त्वपूर्ण नियम


नियम-1 : जब पुल्लिंग को स्त्रीलिंग बनाया जाता है तो कभी-कभी शब्दों के साथ नर या मादा शब्द लगाना पड़ता है।


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

नर कोयल


नर चील


नर मक्खी


नर छिपकली


नर मकड़ी


नर गिलहरी


कछुआ


भालू


खरगोश


मच्छर


जिराफ़


खटमल


उल्लू


भेड़िया


तोताधा


कौआ

कोयल


चील


मक्खी


छिपकली


मकड़ी


गिलहरी


मादा कछुआ


मादा भालू


मादा खरगोश


मादा मच्छर


मादा जिराफ


मादा खटमल


मादा उल्लू


मादा भेड़िया


मादा तोता


मादा कौआ


नियम-2 : अ, आ युक्त पुल्लिंग शब्दों में जब ई प्रत्यय लगा दिया जाता है तो वे स्त्रीलिंग हो जाते हैं। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

गूँगा


गधा


नर


नाला


देव


रस्सा


गोप


नर्तक

गूँगी


गधी


नारी/मादा


नाली


देवी


रस्सी


गोपी


नर्तकी



नियम-3 : जब अ, आ, वा युक्त पुल्लिंग शब्दों को स्त्रीलिंग में बदला जाता है तो अ, आ, वा की जगह पर 'इया' लगा दिया जाता है। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

लोटा


बेटा


बूढ़ा


चिड़ा


बंदर


डिब्बा


कुत्ता

लुटिया


बिटिया


बुढ़िया


चिड़िया


बंदरिया


डिबिया


कुतिया



नियम-4 : अक युक्त पुल्लिंग शब्दों में इका प्रत्यय जोड़कर भी स्त्रीलिंग शब्द बनाए जाते हैं। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

चालक


पाठक


लेखक


गायक


संचालक


अध्यापक


संपादक


संरक्षक


सेवक


संयोजक


बालक

चालिका


पाठिका


लेखिका


गायिका


संचालिका


अध्यापिका


संपादिका


संरक्षिका


सेविका


संयोजिका


बालिका


नियम-5 : कुछ शब्दों में 'आइन' प्रत्यय जोड़कर स्वीलिंग बनाया जाता है। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

चौधरी


हलवाई


गुरु


चौबे 


पंडित 


ठाकुर 


ओझा


पंडा

चौधराइन


हलवाइन


गुरुआइन


चौबाइन


पंडिताइन


ठकुराइन


ओझाइन


पंडाइन



नियम-6 : कुछ पुल्लिंग शब्दों में 'इन' प्रत्यय शब्द जोड़कर स्त्रीलिंग बनाया जाता है। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

साँप + इन 


सुनार + इन


नाती + इन 


चमार + इन 


कुम्हार + इन 


पड़ोसी + इन 


नाग + इन 


धोबी + इन 


बाघ + इन 


सियार + इन 

साँपिन


सुनारिन


नातिन


चमारिन


कुम्हारिन


पड़ोसिन


नागिन


धोबिन


बाघिन


सियारिन


नियम-7 : कुछ पुल्लिंग शब्दों में 'ता' की जगह 'त्री' प्रत्यय लगाकर स्त्रीलिंग बनाया जाता है। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

नेता


दाता


अभिनेता


रचयिता


कर्ता


विधाता


वक्ता


धाता


प्रबन्धकर्ता

नेत्री


दात्री


अभिनेत्री


रचयित्री


कर्त्री 


विधात्री


वक्त्री


धात्री


प्रबन्धकर्त्री


नियम-8 : कुछ जातिवाचक एवं भाववाचक संज्ञा शब्दों में नी प्रत्यय लगाकर पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाया जाता है। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

मोर


शेर


सिंह


ऊँट 


भील

मोरनी


शेरनी


सिंहनी


ऊँटनी


भीलनी


नियम-9 : कुछ पुल्लिंग शब्दों में इनी प्रत्यय जोड़कर पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाया जाता है। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

तपस्वी


हाथी


स्वामी


मनस्वीक


एकाकी


अभिमान


हंस


हितकारी


संन्यासी


सुहास

तपस्विनी


हथिनी


स्वामिनी


मनस्विनी


एकाकिनी


अभिमानिनी


हंसिनी


हितकारिणी


संन्यासिनी


सुहासिनी


नियम-10 : संस्कृत के पुल्लिंग शब्द जिसके अन्त में मान और बान लगा हो, उसे बती और मत्ती में बदलकर पुल्लिंग शब्दों का स्त्रीलिंग बनाया जाता है। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

श्रीमान्


पुत्रवान्


बुद्धिमान्


आयुष्मान्


भगवान्


धनवान्


सत्यवान्


शक्तिमान्


भाग्यवान्

श्रीमती


पुत्रवती


बुद्धिमती


आयुष्मती


भगवती


धनवती


सत्यवती


शक्तिमती


भाग्यवती



नियम-11 : संस्कृत के कुछ अकारान्त शब्दों में आ लगा देने से वे पुल्लिंग शब्द स्त्रीलिंग में बदल जाते हैं। जैसे-


पुल्लिंग 

स्त्रीलिंग 

तनुज


चंचल


आत्मज


शिष्य


सुत


प्रिय


कांत


सुलोचन


पूज्य


श्याम


अग्रज


कृष्ण


छात्र


अनुज

तनुजा


चंचला


आत्मजा


शिष्या


सुता


प्रिया


कांता


सुलोचना


पूज्या


श्यामा


अग्रजा


कृष्णा


छात्रा


अनुजा



कुछ महत्त्वपूर्ण स्त्रीलिंग शब्द

अभिव्यक्ति, आहट, अहिंसा,अरहर, अदालत, अवज्ञा, अश्विनी, अन्त्येष्टि, अग्नि (आग), अफवाह, अपील, अभीप्सा, अपेक्षा, अवस्था, आयु, आज्ञा, आँख, आजीविका, आशा, आत्मा, आय, आस्तीन, आपदा, आशंका, आराधना, आवाज, इमारतें, इच्छा, ईर्ष्या, इज्जत, ईंट, इन्द्रिय, उड़ान, उदासी, उन्नति, उपासना, उपेक्षा, उपनिषद्, उत्कण्ठा, एकता, ओस, केतली, कहानी, काया, कुर्सी, कृष्णा, कोशिश, कौमुदी, केलि, कविता, कृषि, किताब, कुण्डली, कक्षा, कमीज, कुशल, कव्वाली, कृपा, किस्मत, करुणा, कोयला, कटुता, किशमिश, ख्याति, खुशामद, खबर, खैरात, गणना, गति, गर्मी, गरिमा, गजल, गिरफ्त, घोषणा, घृणा, चेचक, चिड़िया, चिकित्सा, चाहत, चट्टान, चाय, चेतना, चिन्ता, छानबीन, छवि, छुआछूत, जागीर, जाति, जुर्राब, जड़ता, जनता, टकसाल, टिप्पणी, डिबिया, डिक्शनरी, तृष्णा, तहसील, तालीम, तस्वीर, तलवार, तनख्वाह, तलाश, तमन्ना, तरकीब, दरगाह, दुर्घटना, दृष्टि, दफा, दुनिया, दवा, दवात, दवाई, दया, दक्षिण, दस्तक, दावत, दोपहर, दीमक, दुर्दशा, दुकान, दहशत, धरोहर, धारणा, धातु, धरती, निर्धनता, नवाबी, नियुक्ति, नहर, निराशा, नसीहत, नफरत, नकल, नुमाइश, नदी, नकेल, नीयत, प्यास, पुस्तक, पंजाबी, प्रजा, परीक्षा, परिधि, प्रार्थना, पायल, प्लेट, पूर्ति, पैठ, परम्परा, पहुँच, प्रगति, पृथ्वी, पंचायत, पतझड़, पुलिस, पोशाक, प्रकृति, पूड़ी, प्रतिज्ञा, पिपासा, परिषद्, पेचिश, प्रतीक्षा, पूछताछ, फौज, फुरसत, फरियाद, बचत, बुन्देली, बिल्ली, बंगाली, ब्राह्मणी, बला, बोलियाँ, बटेर, बात, बन्दूक, बदबू, बरात, बोलचाल, बैठक, बातचीत, बारिश, बनावट, भुजा, भीड़, भाषा, भूमिका, भिक्षा, भभूत, भर्त्सना, भूख, मिर्ची, मिठाई, माया, मीमांसा, मर्यादा, महासभा, मेहनत, मंत्रणा, मणि, ममता, मुलाकात, मिठास, मृत्यु, मुण्डेर, मुहर, माँग, मुसीबत, मिलावट, योग्यता, याचिका, यामा, योजना, यंत्रणा, याचना, यातना, रक्षा, रचना, राशि, रीति, रुचि, राह, रंगत, रियासत, रिश्वत, रुकावट, रिपोर्ट, रोटी, लाइब्रेरी, लक्ष्मी, लहर, लालसा, लागत, लिखावट, लस्सी, वेदना, वृद्धि, व्याख्या, विजय, वेश्या, विडंबना, वकालत, वायु, विद्या, विधि, वसीयत, शिकायत, शहादत, शपथ, शलाका, शिक्षा, शोभा, शाम, शराब, शताब्दी, शिकंजी, सेना, सुबह, सब्जी, सभा, सरकार, सर्दी, सुलह, सलाह, संविदा, सूचना, संहिता, सेवा, समिति, समवेदना, संवेदना, संस्कृत, सौगात, सुगंध, स्थापना, सौगंध, सलामत,संस्था, संसद, सजावट, साजिश, सड़क, सुविधा, सल्तनत, सभ्यता, सनक, सरकार, समस्या, सिफारिश, सजा, सरसों, सुन्दरता, सन्ध्या, साँझ, हालत, हानि, हिस्ट्री, हिन्दी, हकीकत, हिफाजत, हिंसा, हैसियत, हड़ताल, हींग, हवा, हिम्मत, हरकत, ऋतु, क्षमा, घटना, घबराहट, मात, मकई, मूँग, मँझधार, मानी, पखावज, शिष्टता, बुलबुल, देवनागरी, डोर आदि।


उभयलिंगी शब्द


हिन्दी भाषा में कुछ शब्द पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग में समान रूप से प्रयुक्त होते हैं, ऐसे शब्दों को उभयलिंगी शब्द कहते हैं। जैसे- विनय, सहाय, चित्रकार, राष्ट्रपति, स्टेशन, प्लेग, मेल, मन-गढ़न्त, मोटर, पिस्तौल, घास, बर्फ, चाल-चलन, पुस्तक, पवन, तमाखू (तम्बाकू), सन्तान, श्वास, दरार, गेंद, गड़बड़, कलम, आत्मा, मजा, समाज, चलन, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मंत्री।


लिंग के कारण वाक्य में परिवर्तन

लिंग का प्रभाव वाक्य के दूसरे शब्दों पर भी पड़ सकता है।

पुल्लिंग:

लड़का बाजार गया।

स्त्रीलिंग:

लड़की बाजार गई।

इसी प्रकार:

राम अच्छा लड़का है।

सीता अच्छी लड़की है।

यहां “अच्छा” से “अच्छी” और “है” आदि के प्रयोग में लिंग के अनुसार परिवर्तन दिखाई देता है।

UPSSSC PET के लिए महत्वपूर्ण लिंग One-Liners

महत्वपूर्ण पुल्लिंग → स्त्रीलिंग

  • राजा → रानी

  • पुत्र → पुत्री

  • पति → पत्नी

  • वर → वधू

  • नायक → नायिका

  • गायक → गायिका

  • लेखक → लेखिका

  • सेवक → सेविका

  • शिक्षक → शिक्षिका

  • अभिनेता → अभिनेत्री

  • अध्यापक → अध्यापिका

  • छात्र → छात्रा

  • शिष्य → शिष्या

  • बालक → बालिका

  • युवक → युवती

  • पुरुष → स्त्री

  • नर → मादा

  • घोड़ा → घोड़ी

  • शेर → शेरनी

  • बाघ → बाघिन

  • हाथी → हथिनी

  • मोर → मोरनी

  • हिरन → हिरनी

  • ऊंट → ऊंटनी

  • कुत्ता → कुतिया

  • मुर्गा → मुर्गी

  • बकरा → बकरी

परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियां

लिंग के प्रश्नों में अभ्यर्थी अक्सर केवल शब्द के अंतिम अक्षर को देखकर उत्तर चुन लेते हैं। यह तरीका हमेशा सही नहीं होता।

उदाहरण के लिए “पानी” पुल्लिंग है, जबकि “रानी” स्त्रीलिंग है।

इसी प्रकार “दही” पुल्लिंग है, जबकि “दाल” स्त्रीलिंग है।

इसलिए परीक्षा से पहले ऐसे महत्वपूर्ण अपवाद शब्दों की सूची बनाकर Revision करना चाहिए।

UPSSSC PET में लिंग की तैयारी कैसे करें?

क्योंकि आयोग द्वारा  दिए गए UPSSSC PET सिलेबस में सामान्य हिंदी के अंतर्गत लिंग शामिल है और सामान्य हिंदी के लिए 5 अंक निर्धारित हैं, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

तैयारी के लिए सबसे पहले पुल्लिंग और स्त्रीलिंग की मूल अवधारणा समझें। इसके बाद 100–150 महत्वपूर्ण शब्दों की सूची तैयार करें। विशेष रूप से पशु-पक्षी, व्यवसाय, रिश्ते और अलग-अलग शब्दों से बनने वाले स्त्रीलिंग रूप को बार-बार दोहराएं।

इसके बाद अभ्यास के लिए ऐसे प्रश्न हल करें:

प्रश्न: ‘नायक’ का स्त्रीलिंग क्या है?
उत्तर: नायिका

प्रश्न: ‘शेर’ का स्त्रीलिंग क्या है?
उत्तर: शेरनी

प्रश्न: ‘पत्नी’ का पुल्लिंग क्या है?
उत्तर: पति

प्रश्न: ‘रात’ का लिंग क्या है?
उत्तर: स्त्रीलिंग

प्रश्न: ‘समुद्र’ का लिंग क्या है?
उत्तर: पुल्लिंग

निष्कर्ष

लिंग हिंदी व्याकरण का छोटा लेकिन परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। UPSSSC PET 2026 के सामान्य हिंदी सिलेबस में इसे शामिल किया गया है।

अच्छी तैयारी के लिए केवल पुल्लिंग और स्त्रीलिंग की परिभाषा याद करना पर्याप्त नहीं है। लिंग के प्रकार, शब्दों के रूपांतरण, प्रत्ययों का प्रयोग, पशु-पक्षियों के लिंग, रिश्तों के लिंग, व्यवसाय से जुड़े शब्द और महत्वपूर्ण अपवाद शब्दों को भी तैयार करना चाहिए।

Exam Mohalla Tip: परीक्षा से पहले पुल्लिंग-स्त्रीलिंग के महत्वपूर्ण शब्दों की एक शॉर्ट लिस्ट बनाकर रोज 5–10 मिनट Revision करें। इससे कम समय में इस टॉपिक पर अच्छी पकड़ बनाई जा सकती है।



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